उत्तर प्रदेश: अदालती आदेशों की अनदेखी पर सरकार सख्त, अधिकारियों की तय होगी जवाबदेही
Government Cracks Down on Disregard for Court Orders
लखनऊ। Government Cracks Down on Disregard for Court Orders, अदालतों के आदेशों के पालन में हो रही देरी को लेकर प्रदेश सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि यदि समय पर जवाब दाखिल नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने गुरुवार को इस संबंध में सभी अधिकारियों को निर्देश जारी किए।
उन्होंने कहा कि अदालतों में बढ़ रहे अवमानना मामलों को रोकना आवश्यक है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कई मामलों में समय से काउंटर एफिडेविट दाखिल नहीं होने और आदेशों के पालन में देरी के कारण अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना पड़ता है, जिससे सरकार की छवि भी प्रभावित होती है।
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक रिट याचिका का प्रारंभ में ही परीक्षण किया जाएगा, ताकि विभाग स्तर पर ही मामलों का निस्तारण संभव हो सके। आवश्यक मामलों में सक्षम अधिकारी की अनुमति से समय पर जवाब दाखिल किया जाएगा और अपील या पुनर्विचार से पहले विधिक राय लेना अनिवार्य होगा।
साथ ही, विभाग के हर कार्यालय में विधिक प्रकोष्ठ स्थापित किया जाएगा, जिसमें एक नोडल अधिकारी तैनात होगा। निदेशालय स्तर पर इलाहाबाद व लखनऊ खंडपीठ के लिए अलग मानिटरिंग सेल बनाया जाएगा। सभी कार्यालयाध्यक्ष और मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक मासिक समीक्षा करेंगे तथा महत्वपूर्ण मामलों की जानकारी शासन को दी जाएगी।